आज रात मैं चाँद पर जाऊंगा . . .

आज रात मैं चाँद पर जाऊंगा,

सुना है वहाँ सपने रखे होते हैं अपने

उन सपनों से भी कुछ जवाब करना है,
बीते समय की अधूरी हैं जो कहानियाँ
उनका भी वहाँ कुछ हिसाब करना है।

आज रात मैं चाँद पर जाऊंगा,

सालों से जो ख़्वाब हैं अधरों में अपने
उनका निपटारा अब सिताब करना है,
तंग होती जा रही है जो ज़िंदगी अपनी
वहाँ रात भर मस्ती बेहिसाब करना है।

आज रात मैं चाँद पर जाऊंगा।



( सिताब = शीघ्र, जल्दी, तुरंत )



-- अमित पाण्डेय

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