'तुम अब बदल गए हो' . . .

तुम्हारे बारे में सोचते सोचते

खुद को ही भूल गईं हूँ मैं

अब शायद नाराज हूँ थोड़ा सा

पहले खुद से फिर तुमसे भी ।

अभी भी याद है क्या तुम्हें

कितने वादे किए थे तुम उस दिन

मुझे तो अब एक भी याद नहीं

सिर्फ 7 वादे थे दुनिया के सामने

जो चमकते हैं मेरे माथे के सिंदूर में

खनकते हैं कलाइयों की चूड़ियों में

महकते हैं मेरी हाथों की मेहंदी में

और बाँध दिये गए हैं मेरे साथ

गले में मंगलसूत्र बना कर

और उनका क्या जिनके लिए

कोई सबूत नहीं है मेरे पास

शायद गुम हो गए सब के सब

चलते समय के साथ

बढ़ते उम्र के साथ ।

यहाँ दरिया के किनारे भी

साथ साथ बैठे थे घंटो

बिना एक भी शब्द बोले

हमें बातें करने के लिए

शब्दों की जरूरत नहीं थी तब

बिना तुम्हारे कुछ बोले ही

मैं गुलाबी हो जाया करती थी

सिर्फ तुम्हें देखने भर से ।

अब तुम्हारे पास समय ही नहीं है

मेरे लिए या शायद हमारे लिए

घिरी हुई हूँ मैं आजकल

तुम्हारी उपेक्षाओं से

सिर्फ अधेरा ही बचा है

अब मेरे जीवन में ।

ये दरिया आज भी वैसा ही है

जैसा तब था सालों पहले

समय के साथ तो

सिर्फ तुम ही बदलते हो . . .

( चित्र- सुरभि झा )


No comments:

Post a Comment