मेरे लिए ये मुश्किल सा है,
तुम्हें शब्दों में पिरो पाना।
संभव नहीं किसी भी जन से,
ममता को परिभाषित करना।


फिर भी मैं करता हूँ प्रयास,
कोशिश कुछ लिखने की करता।
जब होती न तुम पास मेरे,
निज साये से भी डर जाता|


मेरा अस्तित्व तुम्हीँ से है,
मेरी पहचान तुम्हीँ से है।
तुम से ही जीवन है मेरा,
मेरा अभिमान तुम्हीँ से है।


तुम ही हो मेरी पहली पढ़ाई,
तुमने ही अक्षरज्ञान कराया।
इस हाड़-मांस के ढाँचे को,
जन्म दिया, इंसान बनाया।


माँ तेरे ही देख-रेख में ,
मैने अपनी आँखे खोली।
है याद मुझे अब भी वह दिन,
सुनती तुम मेरी तोतली बोली।


दिन-भर दौड़ना पीछे पीछे,
आँचल पकड़े चलते रहना।
फिर रात बैठ अंबर के नीचे,
लोरी सुनना, बातें करना।


फिर हर सुबह स्कूल के लिए,
तेरा मुझको तैयार कराना।
छुट्टी के बाद गेट पर बाहर,
टकटकी लगाए इंतजार करना।


फिर दिन बदले मैं बड़ा हुआ,
पर निकले, बड़े हुए मेरे।
तू हर पल मेरे साथ रही,

जैसे तू सागर, और मैं लहरेँ।


पर अब मैं घर से बाहर हूँ,
आती पल पल तेरी यादें।
दुनिया देखी, जीना सीखा,
पर जीवन से हैं फरियादेँ।


माँ दूर कभी मुझसे न हो,
अब यही शेष है भाव मेरा|
है अटूट ये रिश्ता अपना,
तू जननी, मैं लाल तेरा ।




( धरती की प्रत्येक माँ को समर्पित )

--अमित पाण्डेय